15 सितम्बर 2026 |
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‘गौ-वंश' की अंतिम यात्रा पर पुलिसिया पहरा: खाकी से भिड़ गए गौ-सेवक और मातृशक्ति, कंधों पर उठाया शव; प्रशासन की संवेदनहीनता पर उठे सवाल

OM Darpan

Dec 18, 2025 12:01 pm 372 views
‘गौ-वंश' की अंतिम यात्रा पर पुलिसिया पहरा: खाकी से भिड़ गए गौ-सेवक और मातृशक्ति, कंधों पर उठाया शव; प्रशासन की संवेदनहीनता पर उठे सवाल

रायपुर।

राजधानी में आस्था और पुलिसिया हठ का एक अजीब मंजर देखने को मिला। जिस गौ-माता को हमारे समाज में 'मां' का दर्जा प्राप्त है, उसकी अंतिम यात्रा को पुलिस प्रशासन ने बलपूर्वक रोकने का प्रयास किया। सुंदर नगर से फुंडर चौक तक निकाली जा रही इस पवित्र यात्रा में जब पुलिस बाधा बनी, तो गौ-सेवक और मातृशक्ति चट्टान बनकर खड़े हो गए। पुलिस की धक्का-मुक्की और रस्साकशी के बावजूद सेवकों का हौसला नहीं डिगा और 'गौ माता' के जयकारों के बीच पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।

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कंधों पर गौ-माता, सामने पुलिस की दीवार

सुंदर नगर से शुरू हुई इस यात्रा का दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था। गौ-सेवक और बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाएं (मातृशक्ति) मृत गौवंश के शव को अपने कंधों पर लेकर चल रहे थे। यह केवल एक शव यात्रा नहीं, बल्कि गौ-माता के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रदर्शन था। लेकिन, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस शांतिपूर्ण यात्रा को बीच में ही रोक दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस ने सेवकों के साथ धक्का-मुक्की की और यात्रा को आगे बढ़ने से रोका, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति निर्मित हो गई।

"हत्यारों पर नरमी, सेवकों पर गर्मी क्यों?"

यात्रा का नेतृत्व कर रहे चर्चित गौ-सेवक और मोटिवेशनल स्पीकर आदेश सोनी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने प्रशासन को आईना दिखाते हुए कहा, "पुलिस जितनी तत्परता और बल का प्रयोग आज निहत्थे गौ-सेवकों और महिलाओं को रोकने में कर रही है, अगर उतनी ही मुस्तैदी गौ-हत्यारों को पकड़ने में दिखाई होती, तो आज सड़कों पर गौवंश की यह दुर्दशा नहीं होती।"

सोनी ने सवाल उठाया कि जब गौवंश मृत पड़ा होता है, तब प्रशासनिक अमला नदारद रहता है, लेकिन जब कोई सेवक अपने खर्च और श्रम से उनका अंतिम संस्कार करना चाहता है, तो उसे अपराधी की तरह रोका जाता है।

मातृशक्ति ने दिया पुलिस को करारा जवाब

इस पूरे घटनाक्रम में मातृशक्ति की भूमिका अविस्मरणीय रही। पुलिस के भारी विरोध के बावजूद महिलाएं पीछे नहीं हटीं। उन्होंने पुलिस को स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपनी 'माता' का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान से करके ही रहेंगी। पुलिस छावनी में तब्दील हुए इलाके में घंटों तक चली रस्साकशी के बाद अंततः प्रशासन को गौ-भक्तों की आस्था के आगे झुकना पड़ा।

7 लाख पत्र और गौ-रक्षा का संकल्प

गौ-सेवकों ने बताया कि वे लंबे समय से गौ-संरक्षण के लिए कड़े नियम और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। प्रशासन तक अपनी बात पहुँचाने के लिए अब तक करीब 7 लाख पत्र लिखे जा चुके हैं, जो सेवकों के धैर्य और समर्पण का प्रमाण है। आदेश सोनी, जिन्होंने गौ-रक्षा के लिए पूर्व में अपनी उंगली तक का बलिदान दिया था, ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की बेरुखी उनके संकल्प को नहीं तोड़ सकती। गौ-सेवकों ने संकल्प दोहराया कि वे हर परिस्थिति में गौवंश की रक्षा और सम्मान के लिए तत्पर रहेंगे।

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