रायपुर।
छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार ने किस तरह से महिलाओं के जीवन में बदलाव लाया, इसका एक बेहतरीन उदाहरण है रायपुर के मोवा की निवासी श्रीमती भुनेश्वरी साहू। उनकी कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह यह भी दिखाती है कि यदि अवसर मिले तो कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है।
दीदी ई-रिक्शा योजना: एक नया अवसर
कभी श्रमिक के तौर पर काम करने वाली श्रीमती साहू ने “दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना” के तहत एक ई-रिक्शा खरीदी और उसे अपना आजीविका का साधन बना लिया। इस योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा पंजीकृत महिला श्रमिकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए एक लाख रूपए की अनुदान राशि दी जाती है। श्रीमती साहू ने इसका लाभ उठाया और आज वह अपनी मेहनत से एक सशक्त महिला के रूप में समाज में उभरी हैं।
संघर्ष से सफलता तक
रायपुर के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रीमती भुनेश्वरी साहू कभी रोजी-मजदूरी करती थीं। हालांकि सीमित आय और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनके अंदर आत्मनिर्भर बनने की इच्छा कभी खत्म नहीं हुई। आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
“पहले मैं एक श्रमिक के रूप में काम करती थी और मुश्किल से घर का खर्च चलाती थी। लेकिन मेरा सपना था कि मैं कुछ अपना करूं, जिससे न केवल मेरा बल्कि मेरे बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित हो सके,” श्रीमती साहू ने बताया।
स्वरोजगार: आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक
श्रीमती साहू ने ई-रिक्शा चलाने के जरिए अपनी दैनिक आय का साधन स्थापित किया। अब वह प्रतिदिन 6 से 8 घंटे ई-रिक्शा चलाती हैं और उसी से प्राप्त आय से अपने परिवार का खर्च चलाने के साथ-साथ अपने बच्चों को पढ़ा रही हैं। वह अपने व्यवसाय का विस्तार करने का सपना देख रही हैं और इस दौरान अपनी ईएमआई भी चुका रही हैं।
“सरकार की योजनाएं हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। आज मैं अपने दम पर खड़ी हूं, और समाज में आत्मविश्वास के साथ जी रही हूं,” श्रीमती साहू ने गर्व से कहा।
छत्तीसगढ़ सरकार का योगदान
श्रीमती साहू ने छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की योजनाओं का आभार व्यक्त किया। उनका मानना है कि राज्य सरकार की सोच और योजनाओं ने महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ा है और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया है।






