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जहाँ फेल हुआ मोबाइल नेटवर्क, वहाँ जीत गई स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता: बुजुर्गों के लिए भरतपुर में अनोखी जंग!

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मोबाइल नेटवर्क की बाधा भी नहीं रोक पाई रास्ता, मौके पर ही बन रहे बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड

एमसीबी/भरतपुर।

एमसीबी जिले के अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के संकल्प को अब धरातल पर उतारा जा रहा है। भरतपुर विकासखंड में स्वास्थ्य विभाग ने सेवा और संवेदनशील प्रशासन की एक प्रेरक मिसाल पेश की है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, कठिन पहाड़ी रास्तों और कमजोर मोबाइल नेटवर्क जैसी गंभीर चुनौतियों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम बुजुर्गों के ‘आयुष्मान वय वंदन कार्ड’ बनाने के लिए निरंतर फील्ड में डटी हुई है।

भरतपुर के अंदरूनी गांवों में नेटवर्क की समस्या कार्ड बनाने में सबसे बड़ी बाधा बन रही थी। इसका समाधान निकालने के लिए विभाग ने एक अभिनव और मानवीय व्यवस्था अपनाई है। जिन इलाकों में मोबाइल नेटवर्क बेहतर मिल रहा है, विभाग की टीम वहां बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक पहुँचा रही है और मौके पर ही उनके कार्ड तैयार किए जा रहे हैं। इस व्यावहारिक पहल से उन बुजुर्गों को सीधा लाभ मिल रहा है, जो अब तक तकनीकी दिक्कतों के कारण योजना से वंचित थे।

स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी न केवल कार्ड बनाने का काम कर रहे हैं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को योजना के फायदों के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। गौरतलब है कि आयुष्मान वय वंदन कार्ड योजना 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए है, जिसमें बिना किसी पारिवारिक आय की बाध्यता के ₹5 लाख तक के निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलती है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि विभाग का लक्ष्य जिले के हर पात्र बुजुर्ग तक पहुँचना है। उन्होंने कहा कि नेटवर्क की समस्या चुनौतीपूर्ण है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ फील्ड में कार्य कर रही है ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इस सुविधा से वंचित न रहे।

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