Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

पं. रविशंकर विश्वविद्यालय में टेक्नीशियन भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

Listen to this article

  •  35 की उम्र सीमा में 37 साल के अभ्यर्थी की नियुक्ति

  • आरटीआई में खुलासा- नियमों को ताक पर रखकर बांटी नौकरी

  • राजभवन और यूजीसी को भी गुमराह करने का आरोप

रायपुर.

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) में शासकीय पदों पर नियुक्ति में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय में टेक्नीशियन ग्रेड-2 के पद पर हुई एक नियुक्ति को लेकर एनएसयूआई ने दस्तावेजों के साथ मोर्चा खोला है। सूचना का अधिकार (RTI) से मिले दस्तावेजों का हवाला देते हुए संगठन ने दावा किया है कि नियुक्ति में विज्ञापन की शर्तों और आयु सीमा के नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन किया गया है।


‘आयु सीमा फेल, भ्रष्टाचार पास’

एनएसयूआई जिला अध्यक्ष शांतनु झा द्वारा जारी दस्तावेजों के मुताबिक, विश्वविद्यालय ने 28 दिसंबर 2011 को विज्ञापन जारी किया था, जिसमें सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित थी। आरोप है कि जिस बालगोविंद नायक नामक कर्मचारी की नियुक्ति की गई, उनकी जन्मतिथि 15 जुलाई 1974 है।

विज्ञापन की तिथि के अनुसार, अभ्यर्थी की आयु 37 वर्ष 5 माह 13 दिन थी। नियमों के तहत वे स्पष्ट रूप से अपात्र थे, इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें अनारक्षित (सामान्य) वर्ग में नियुक्ति दे दी। संगठन ने इसे “आयु सीमा फेल, भ्रष्टाचार पास” का नाम दिया है।

उच्च संस्थानों को भेजी भ्रामक जानकारी

मामला केवल गलत नियुक्ति तक सीमित नहीं है। दस्तावेजों से यह भी पता चला है कि इस गड़बड़ी को छिपाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने संवैधानिक संस्थाओं को भी गुमराह किया। आरोप है कि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा कार्यालय, राज्यपाल कार्यालय, यूजीसी (UGC) और नैक (NAAC) को भेजी गई रिपोर्ट में तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया।

प्रशासन ने शासन को जानकारी दी कि उक्त कर्मचारी की नियुक्ति ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (OBC) के तहत की गई है, जबकि असल में नियुक्ति ‘अनारक्षित श्रेणी’ में हुई थी। एनएसयूआई का दावा है कि उनके पास अधिकारियों और कर्मचारी के बीच सांठ-गांठ, फाइलों को दबाने और नोटशीट में छेड़छाड़ के पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं।

जांच और बर्खास्तगी की मांग

एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने तीन सूत्रीय मांगें रखी हैं:

  1. साक्ष्यों की जांच कर तत्काल प्रभाव से बालगोविंद नायक की नियुक्ति निलंबित या समाप्त की जाए।

  2. पूरे प्रकरण की जांच उच्च स्तरीय या राज्य स्तरीय समिति से कराई जाए।

  3. शासन को गलत जानकारी देने वाले दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

शांतनु झा ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जल्द पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

news paper editing
previous arrow
next arrow