नाम अंबेडकर अस्पताल और अंबेडकर के अनुयायी को ही भर्ती करने बेड नहीं
OM Darpan
May 24, 2024 01:56 am
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24 May 2024
सुरेंद्र जैन/रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 400 किलो मीटर की दूरी से अपनी गरीब बेबस मां का अंबेडकर अस्पताल में इलाज कराने आई बेटी सिस्टम की मनमानी के आगे नतमस्तक हो गई। गंभीर रूप से बीमार जिंदगी और मौत से जूझ रही बस्तर के गीदम जिला दंतेवाड़ा निवासी गायत्री जोगी की बेटी शीतल जोगी ने बताया कि उसकी माँ गंभीर रुप से बीमार है पिता के जाने के बाद से शीतल जोगी उम्र 18 साल दुकानों में मेहनत मजदूरी कर किसी तरह परिवार चलाती है उसके छोटे भाई भी है एक तरफ महंगाई की मार दूसरी तरफ बेरोजगारी की मार ओर तीसरी तरफ मां की बीमारी 18 साल की बेटी के ऊपर तो मानो दुखो का पहाड़ टूट पड़ा क्योंकि पिता की मौत के बाद घर मे कमाने वाला भी कोई नहीं भाई बहुत छोटे हैं आर्थिक तंगी के बीच बेटी शीतल जोगी ने पहले वही सरकारी अस्पताल में कुछ दिन इलाज कराया और फिर वहां के चिकित्सकों ने उसे रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में इलाज कराने भेजा शीतल ने बताया कि वह बीमार मां का उपचार कराने गीदम से रायपुर आई यहां जांच कर बोला गया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद उपचार होगा जांच के बाद वह गीदम चली गई और जांच रिपोर्ट आने पर पुनः रायपुर आई अंबेडकर में मां को लेकर गई रोज रोज अंबेडकर आती एक धर्मशाला में उसने आश्रय ले लिया मां का डॉक्टर ने इलाज शुरू करते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती करने कहा लेकिन जब वार्ड में पहुची तो नर्स ने बोला कोई बेड खाली नहीं है डॉक्टर साहब से बोल दो भर्ती कराना है तो पहले कोई बेड खाली करवाएं इस तरह करीब सप्ताह भर थे 18 वर्षीय शीतल जोगी हैरान परेशान रही और अंततः जब उसकी मां को अंबेडकर में भर्ती नहीं किया तो वह हताश निराश होकर भगवान भरोसे मां को वापस घर गीदम ले जाने लगी और भाठागांव बस स्टैंड पहुच गई।400 किलो मीटर दूर बस्तर के गीदम से आई बीमार बेबा मां को लेकर भटकती रही बेटी बड़ा सवाल आखिर कहां जाएं उपचार कराने गरीब लाचार लोग
परिचित को बताई आपबीती अपनी मां के इलाज को दर दर भटक रही शीतल को मां की सहेली का ध्यान आया कि वह धरसींवा के पास रहती हैं और ध्यान आते ही उसने मां की सहेली को काल कर मां की गंभीर बीमारी और अंबेडकर अस्पताल में भर्ती नहीं करने की बात बताई
मां की सहेली ने की मां की मदद जानकारी मिलते ही मां की सहेली ने अपने पति को कार से भेजकर पीड़ित को भाठागांव बस स्टैंड से एम्स तक पहुचाया अब एम्स तो पहुच गए लेकिन वहां भी भर्ती नहीं किया निवेदन करने पर रात वही रुकने की अनुमति जरूर दे दी है अब यहां बड़ा सवाल यह उठता है की क्या अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कर इस गरीब बीमार लाचार महिला का चिकिसक समुचित उवचार नहीं कर सकते
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